Amavasya 2019: अमावस्या 2019 दिन व तारीखें

जानें वर्ष 2019 में पड़ने वाली अमावस्या की तारीख, वार और प्रकार, साथ ही पढ़ें हिन्दू धर्म में अमावस्या की तिथि का महत्व और इस दिन किये जाने वाले भी धार्मिक कर्म की जानकारी।


अमावस्या 2019
दिनाँक वार अमावस्या
5 जनवरी, 2019 शनिवार मार्गशीर्ष अमावस्या
4 फरवरी, 2019 सोमवार पौष अमावस्या
6 मार्च, 2019 बुधवार माघ अमावस्या
5 अप्रैल, 2019 शुक्रवार फाल्गुन अमावस्या
4 मई, 2019 शनिवार चैत्र अमावस्या
3 जून, 2019 सोमवार वैशाख अमावस्या
2 जुलाई, 2019 मंगलवार ज्येष्ठ अमावस्या
1 अगस्त, 2019 गुरुवार आषाढ़ अमावस्या
30 अगस्त, 2019 शुक्रवार श्रावण अमावस्या
28 सितंबर, 2019 शनिवार भाद्रपद अमावस्या
28 अक्टूबर, 2019 सोमवार अश्विन अमावस्या
26 नवंबर, 2019 मंगलवार कार्तिक अमावस्या
26 दिसंबर, 2019 गुरुवार मार्गशीर्ष अमावस्या

अमावस्या 2019

शायद ही हममें से कोई ऐसा हो जिसे अमावस्या के बारे में न पता हो। हिंदू धर्म में अमावस्या का कई मायनों में महत्व है। महीने में एक बार अमावस्या आती है। इस दिन आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता है। यही कारण है कि अमावस्या को अंधेरी रात कहते हैं। इस दिन के कई लाभ और कई नुकसान भी हैं। हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार दीपावली भी अमावस्या के दिन ही आती है, इसलिए इस दिन दीप और मोमबत्ती जलाकर प्रकाश किया जाता है। अमावस्या के दिन व्रत रखने और विधि विधान से पूजा करने की भी मान्यता है। हर महीने में दो पक्ष होते हैं। एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष। चंद्रमा की बढ़ती हुई कलाओं वाला पखवाड़ा शुक्ल पक्ष कहलाता है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। अमावस्या के दिन चंद्रमा पूरी तरह से विलुप्त हो जाता है।

अमावस्या का धार्मिक महत्व

अमावस्या को कई तरह से महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। पितरों को याद करने के साथ ही इस दिन गंगा स्नान करने का भी विशेष महत्व होता है। अमावस्या के दिन व्रत रखने से भी कष्टों और संकट से मुक्ति मिलती है। इस दिन गंगा जी में स्नान करने, घर में पाठ पूजा करने, तर्पण देने और दान आदि करने से पुण्य तो मिलता ही है, साथ ही पूर्वजों को मोक्ष और शांति भी मिलती है। यदि जातक के माता-पिता जीवित हैं तो उन्हें भी इस दिन सम्मान दें और उनकी इच्छा पूरी करें बहुत लाभ होगा। जिन लोगों पर कालसर्प दोष होता है इस दिन उपाय करने से उन्हें भी मुक्ति मिलती है। ज्योतिषियों के मुताबिक अमावस्या के दिन विधि विधान से पूजा करने का नियम है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमावस्या का विपरित प्रभाव भी पड़ता है। यही कारण है कि इस दिन व्रत रखने और गंगा स्नान करने पर जोर दिया जाता है। कहते हैं कि जो बच्चे अमावस्या के दिन पैदा होते हैं वह बहुत बुद्धिमान, विवेकशील और संयमी होते हैं व उनका शिक्षा के प्रति गहरा रुझान रहता है। अमामस्या के दिन पितरों को तर्पण देने, गरीबों को दान देने और गंगा जी में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

कितने प्रकार की होती है अमावस्या

अमावस्या के दो प्रकार होते हैं। पहला मौनी और दूसरा सोमवती अमावस्या। जो अमावस्या माघ महीने में आती है उसे मौनी अमावस्या कहते हैं। जबकि जो सोमवार के दिन आती है उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। 2019 में 6 मार्च को मौनी अमावस्या है जबकि 4 फरवरी (पौष माह), 3 जून (वैशाख) और 28 अक्टूबर (अश्विन) को सोमवती अमावस्या पड़ रही है। मौनी अमावस्या के दिन गंगा जी में स्ननान करने या किसी धार्मिक स्थल की यात्रा करने को बहुत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन लोग सच्चे दिल से व्रत रखने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। लेकिन यदि आपके लिए यह सब संभव नहीं है तो आप अपने घर पर भी गंगा जल से स्नान कर सकते हैं। मौनी व्रत के उलट सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखने की परंपरा है। इस दिन विवाहित स्त्री अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। साल 2019 में धार्मिक मान्यता है कि सोमवती अमास्या वाले दिन पीपल के पेड़ में सभी देवताओं का वास होता है। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने, दूध चढ़ाने, जल चढ़ाने और फूल आदि चढ़ाने से काफी पुण्य मिलता है। अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर कलावा बांधने से भी बहुत लाभ मिलता है।

अमावस्या और ज्योतिषीय तथ्य

ज्योतिषों की मान्यता है कि अमावस्या के लिए पूजा करने का विधि विधान बहुत अलग होता है। इस दिन चंद्रमा नहीं निकलता है इसलिए पूजा करने का नियम भी अलग होता है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं होती है उनके लिए अमावस्या का दिन उन्हें तर्पण ​देने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। पितरों से वरदान मिलने और अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ पुण्य फलदायी माना गया है। माघ, फाल्गुन, बैसाखी, श्रावण, कार्तिक और ज्येष्ठ को काफी शुभ अमावस माना जाता है। इन अमावस में खास तौर पर पूजा पाठ करनी चाहिए। इस दिन ग्रहों के चाल कुशल और नीतिपूर्ण होने के चलते इस दिन का बहुत महत्व है। यदि आप संपन्न हैं तो इस दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भरपेट भोजन खिलाएं और अपनी श्रृद्धानुसार दान करें। सूर्यास्त के बाद 5 कन्याओं को भोज कराना भी बहुत शुभ होता है।

मौनी अमावस्या के दिन क्या करें

  • मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना लाभप्रद होता है। ऐसा करने से घर में सुख शांति आती है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।
  • मौनी अमावस्या के दिन किसी धार्मिक स्थल की यात्रा करने, पवित्र नदी में स्नान करने या पवित्र स्थल पर जाने से मंगल ही मंगल होता है।
  • मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने की मान्यता है। ऐसा करने का प्रतिफल काफी अनुकूल होता है।
  • संपन्न लोगों द्वारा इस दिन गरीब व भूखे व्यक्ति को भरपेट भोजन खिलाना चाहिए। लगभग 5 कन्याओं को घर पर भोजन खिलाने और उन्हें दान करना भी अच्छा माना जाता है।
  • सूर्योदय के वक्त पितरों को जल या दूध से तर्पण दें। यदि दूध में काले तिल और एक चम्मच शुद्ध देसी का घी डालेंगे तो बहुत अच्छा होगा।

सोमवती अमावस्या के दिन क्या करें

  • सोमवती अमावस्या के दिन नहा धोकर व्रत धारण करें।
  • इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पाप मिटते हैं।
  • अमावस्या के दिन दुर्गा माता या हनुमान चालीसा का पाठ करें। पूजा के बाद प्रसाद को सब लोगों में बांटें।
  • अमावस के दिन मछलियों को आंटा खिलाने से भी बहुत लाभ मिलता है।

  • इस दिन किसी ब्राह्मण की स्त्री को लाल जोड़ा दान करें। साड़ी के साथ लाल चूढ़ियां, लाल सिंदूर, लाल बिंदी और लाल शॉल या स्वैटर भेंट करना भी अच्छा माना जाता है।

सावधानियाँ

  • तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • सूर्यास्त के बाद घर से बाहर न निकलें।
  • गर्भवती महिलाएँ छत पर न जाएं।
  • इस दिन देर तक नहीं सोना चाहिए।
  • इस दिन संबंध बनाने से बचना चाहिए।

हम आशा करते हैं कि अमावस्या के धार्मिक महत्व पर आधारित यह लेख आपको पसंद आया होगा। कुण्डली फ्री डॉटकॉम पर विज़िट करने के लिए धन्यवाद!