नवरात्रि 2020 दिनांक और शुभ मुहूर्त

नवरात्रि त्यौहार हमारे देश भारत का बहुत ही पवित्र और प्रसिद्ध त्यौहार है। नवरात्रि के अवसर पर माता के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। इस पावन अवसर पर सिर्फ एक नहीं बल्कि माता के पूरे नौ रूपों की आराधना की जाती है। इसलिए इसे नवरात्रि कहा जाता है। यह पर्व साल में दो बार आता है, जिसे चैत्र और शरद नवरात्र कहते हैं। नवरात्रि में व्रत रखने को काफी शुभ माना जाता है।

नवरात्रि 2020

1. चैत्र नवरात्रि 2020

चैत्र नवरात्रि को हिंदुंओ के मुख्य धार्मिक त्योहारों में से एक माना जाता है। इसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि 2020 - दिनांक एवं तिथि

क्र. सं. दिनांक माता के नौ रूप तिथि
25 मार्च, 2020
माँ शैलपुत्री प्रतिपदा
2. 26 मार्च, 2020 माँ ब्रह्मचारिणी द्वितीया
3. 27 मार्च, 2020 माँ चंद्रघण्टा तृतीया
4. 28 मार्च, 2020 माँ कूष्माण्डा चतुर्थी
5. 29 मार्च, 2020 माँ स्कंदमाता पंचमी
6. 30 मार्च, 2020 माँ कात्यायिनी षष्ठी
7. 31 मार्च, 2020 माँ कालरात्रि सप्तमी
8. 1 अप्रैल, 2020 माँ महागौरी अष्टमी
9. 2 अप्रैल, 2020 माँ सिद्धिदात्री नवमी
10. 3 अप्रैल, 2020 नवरात्रि पारणा दशमी

कहा जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में माता की विधिपूर्वक पूजा करने और व्रत रखने से घर में खुशहाली आती है और दुख तकलीफें दूर होती हैं। वेद-पुराणों में भी ये कहा गया है कि मां दुर्गा ने असुरों का वध किया था और इस संसार की रक्षा की थी।

चैत्र नवरात्रि 2020 के लिए घटस्थापना मुहूर्त

दिनांक घटस्थापना मुहूर्त अवधि
25 मार्च, 2020 (बुधवार) 06:18:56 से 07:17:12 तक 58 मिनट

नोट : दिया गया घटस्थापना मुहूर्त का समय नई दिल्ली, भारत के लिए है।

2. शरद नवरात्रि 2020

शारदीय नवरात्रि को हिंदू समुदाय के श्रद्धालु अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाते हैं। शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है।

शारदीय नवरात्रि 2020 - दिनांक एवं तिथि

क्र. सं. दिनांक माता के नौ रूप तिथि
1. 17 अक्टूबर, 2020 माँ शैलपुत्री प्रतिपदा
2. 18 अक्टूबर, 2020 माँ ब्रह्मचारिणी द्वितीया
3. 19 अक्टूबर, 2020 माँ चंद्रघण्टा तृतीया
4. 20 अक्टूबर, 2020 माँ कूष्माण्डा चतुर्थी
5. 21 अक्टूबर, 2020 माँ स्कंदमाता पंचमी
6. 22 अक्टूबर, 2020 माँ कात्यायिनी षष्ठी
7. 23 अक्टूबर, 2020 माँ कालरात्रि सप्तमी
8. 24 अक्टूबर, 2020 माँ महागौरी अष्टमी
9. 25 अक्टूबर, 2020 माँ सिद्धिदात्री नवमी
10. 26 अक्टूबर, 2020 पारणा एवं दुर्गा विसर्जन दशमी

नवरात्रि के समय मां के भक्त उनसे अपने सुखी जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। इस अवसर पर देश के कई हिस्सों में मेलों और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि नवरात्रि और भी देशों में मनाई जाती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में किस दिन मां दुर्गा के किस रूप की पूजा होती है। आइए जानते हैं:—

1. मां शैलपुत्री

2. मां ब्रह्मचारिणी

3. मां चंद्रघण्टा

4. मां कूष्मांडा

5. मां स्कंद माता

6. मां कात्यायनी

7. मां कालरात्रि

8. मां महागौरी

9. मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि पर्व का क्या महत्व है?

नवरात्रि पर्व मुख्य रूप से भारत के उत्तरी राज्यों में मनाया जाता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और गुजरात में भी इस त्यौहार की छटा देखते ही बनती है। मां दुर्गा को खुश करने और उनका आर्शीवाद पाने के लिए लोग व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक उनकी पूजा करते हैं। इन नौ दिनों में घर में प्याज, लहसुन, मीट, अण्डा और मदिरापान का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इन नौ दिनों में सीधा और सरल जीवन अपनाता है तो उसे काफी लाभ मिलता है। नौ दिन व्रत रखने के बाद घर में कन्या का पूजन किया जाता है। जिसमें उन्हें पूड़ी, चने की सब्जी और हल्वा खिलाकर भोग लगाया जाता है। इस दिन कन्याओं को उपहार और दक्षिणा देने से भी घर में ​बरकत होती है। नवरात्रि के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। हिंदू पुराणों के मुताबिक इसी दिन भागवान श्री राम ने लंकानरेश रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त की थी।

नवरात्रि से जुड़ी परंपरा और नौ दिन का महत्व

नवरात्रि का त्यौहार पूरे नौ दिन उत्साह और हर्ष के साथ मनाया जाता है। भक्तजन घटस्थापना करके नौ दिनों तक मां की विधिपूर्वक आराधना करते हैं। मां दुर्गा के भक्त माता का आर्शीवाद पाने के लिए व्रत रखते हैं और घर में कीर्तन भजन आदि करते हैं।

  • नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री माता पार्वती का ही दूसरा रूप है। इन्हें हिमालय राज की पुत्री कहा जाता है। इनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है तथा यह मां नंदी की सवारी करती है। शक्ति और कर्म इनके प्रतीक हैं।
  • नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी का दिन होता है। ऐसा कहा जाता है कि जब मां पार्वती अविवाहित थी तब उन्हेंब्रह्मचारिणी कहा जाता था। यानि कि यह दिन भी मां पार्वती का ही होता है। ये मां श्वेत वस्त्र धारण किए हुए होती हैं और इनके दाएं हाथ में कमण्डल और बाएं हाथ में जपमाला होती है। देवी का स्वरूप अत्यंत तेज़ और ज्योतिर्मय है। ये मां शांति और सकारात्मकता की प्रतीक है।
  • नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघण्टा को समर्पित होता है। पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि माँ पार्वती और भगवान शिव के विवाह के दौरान उनका यह नाम पड़ा था। मां चंद्रघण्टा का प्रिय रंग पीला होता है इसलिए इस दिन पीले रंग धारण किए जाते हैं। यह रंग साहस का प्रतीक है।
  • नवरात्रि के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा होती है। मां कुष्मांडा शेर की सवारी करती हैं और उनकी आठ भुजाएं होती हैं। ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी पर होने वाली हरियाली माँ के इसी रूप के कारण है। इस दिन हरे कपड़े पहनने को शुभ माना जाता है।
  • नवरात्र का पांचवां दिन मां स्कंदमाता का होता है। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। इनकी चार भुजाएं होती हैं। माता अपने पुत्र को लेकर शेर की सवारी करती है। इस दिन ग्रे रंग के कपड़े पहनने की मान्यता है।
  • नवरात्र के छवें दिन मां कात्यायिनी को पूजा जाता है। माता कात्यायिनी साहस का प्रतीक हैं। ये शेर की सवारी करती हैं और उनकी चार भुजाएं हैं। इस दिन केसरिया रंग का महत्व होता है।
  • सातवां दिन मां कालरात्रि का होता है और ऐसा कहा जाता है कि जब मां पार्वती ने शुंभ-निशुंभ नामक दो राक्षसों का वध किया था तब उनका रंग काला हो गया था। इसके बावजूद इस दिन काले के बजाय सफेद रंग पहना जाता है।
  • नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। माता का यह रूप शांति और ज्ञान की देवी का प्रतीक है। इस दिन पिंक कपड़े पहने जाते हैं।
  • नवरात्रि का अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री का होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने वालों को सिद्धि प्राप्त होती है। मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर विराजमान हैं और उनकी चार भुजाएं होती हैं।

नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री

नवरात्रि के व्रत रखने और पूजा करने का तभी लाभ होता है जब सब कार्य विधिपूर्वक किये जाएं। आज हम आपको नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री बता रहे हैं। इसके लिए आपको मां दुर्गा की नई तस्वीर, लाल चुन्नी, लाल कपड़ा, गंगा जल, माता का श्रृंगार, आम की पत्तियां, लौंग का जोड़ा, उपले, जौ के बीज, चंदन, नारियल, कपूर, गुलाल, पान के पत्ते,सुपारी और इलायची की आवश्यकता होती है।

नवरात्रि पूजा की विधि

  • सुबह जल्दी उठकर साफ पानी से स्नान करें।
  • मंदिर में माता की तस्वीर के आगे सारी सामग्री रखें।
  • पूजा की थाली को सजाएं। विधिनुसार कलश को स्थापित करें।
  • इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें।
  • अब मंदिर के साथ ही पूरे घर में गंगाजल छिड़कें।
  • नौ दिनों तक मां दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें।
  • नवमी वाले दिन नौ कन्याओं को बिठाकर भोजन कराएं।

हम कामना करते हैं कि इस नवरात्रि माँ दुर्गा का आशीर्वाद आप के ऊपर बना रहे। आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।