दिवाली 2020 दिनांक और पूजा मुहूर्त

दिवाली 2020 के इस लेख के माध्यम से हम दिवाली के बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। दिवाली हमारे देश का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध त्यौहार है। यह त्यौहार बुराई की हार और अच्छाई की जीत का घोतक है। भगवान राम द्वारा लंकानरेश रावण का वध करने और माता सीता को घर वापस लाने की खुशी में दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। इस वर्ष दिवाली का ये पावन त्यौहार 14 नवंबर, 2020 को देशभर में मनाया जाएगा। यह त्यौहार सिर्फ एक दिन का नहीं बल्कि पूरे पांच दिन का होता है। इन दिनों पूरा देश दुल्हन की तरह सजता है। लोग दीप और बिजली की लड़ियों के साथ अपने घर को सजाते हैं और भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

दिवाली 2020

दिवाली 2020 पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त 17:30:10 से 19:26:01 तक
अवधि 1 घंटे 55
प्रदोष काल 17:27:47 से 20:07:03 तक
वृषभ काल 17:30:10 से 19:26:01 तक

सूचना: यह मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है।

धनतेरस से शुरू हुए इस त्यौहार की रौनक भाईदूज तक रहती है। दिवाली का त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन, सिख और यहां तक कि मुसलिम समुदाय के लोग भी दिवाली मनाते हैं। जैन धर्म में दिवाली को भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। जबकि सिख समुदाय में इसे बंदी छोड़ दिवस के तौर पर मनाते हैं। कहने को ये हिंदुओं का त्यौहार है लेकिन यह त्यौहार पूरे देश का त्यौहार है।

दिवाली 2020: दिवाली कब मनाई जाती है?

दिवाली खुशियों और हर्षोल्लास का त्यौहार है। यह अमावस्या को मनाया जाने वाला त्यौहार है। कार्तिक मास में अमावस्या के दिन प्रदोष काल के अवसर पर दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है। यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाई जाती है। जब​कि दूसरे खेमे की ज्योतिषों का कहना है कि अगर दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल में नहीं आती है तो पहले दिन दिवाली मनाई जानी चाहिए। जबकि यदि अमावस्या किसी भी दिन न आए तो ऐसी स्थि​ति में पहले दिन चतुर्दशी तिथि को ही दिवाली मनाने का विधान है। दीवाली की लोकप्रियता देशभर में है। दीवाली का मुहूर्त महानिशीथ काल या प्रदोष काल में होता है। यह त्यौहार हमारे देश भारत के अलावा तोबागो, सिंगापुर, सुरीनाम, नेपाल, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद, श्री लंका, म्यांमार, मलेशिया और फिजी में भी मनाया जाता है। इस दिन इन देशों में राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की जाती है।

दिवाली 2020: इस दिन कब करनी चाहिए लक्ष्मी की पूजा ?

मुहूर्त का नाम समय विशेषता महत्व
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय स्थिर लग्न की वजह से पूजा का विशेष महत्व
महानिशीथ काल मध्य रात्रि में पड़ने वाला मुहूर्त माता काली के पूजन का विधान तांत्रिक पूजा के लिए शुभ समय

दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने का विधान है। खील-बताशे और मिठाई के साथ इस दिन घी का दीपक जलाकर भगवान को प्रसन्न किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी इस दिन हर किसी के घर में किसी न किसी रूप में दर्शन देती है। माता लक्ष्मी की पूजा करने के लिए एक निश्चित समय होता है। उसी समय पर पूजा करने को शुभ माना जाता है। प्रदोष काल में यानि कि सूर्यास्त के बाद देवी लक्ष्मी की पूजा करने का समय उचित होता है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन चारों राशियों का स्वभाव स्थिर होता है। ज्योतिषों का कहना है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाये तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है। यदि इस दिन घर में किसी ब्राह्मण को बुलाकर पूजा पाठ की जाए तो बहुत शुभ संकेत मिलते हैं। इस काल में मां काली की पूजा का भी विधान है, हालांकि इसे बहुत कम लोग ही जानते हैं। इसके अलावा वे लोग भी इस समय में पूजन कर सकते हैं, जो महानिशिथ काल के बारे में समझ रखते हों।

दिवाली 2020: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि

दिवाली के लगभग एक महीने पहले से ही लोग अपने घरों की सफाई करनी शुरू कर देते हैं। हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि माता लक्ष्मी साफ जगह पर ही वास करती है। इसलिए माता लक्ष्मी को अपने घर बुलाने और ठहराने के लिए लोग जमकर साफ-सफाई करते हैं। मुहूर्त के अनुसार दिवाली की शाम को विधि पूर्वक पूजा की जाती है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। इस दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी के साथ कुबेर की पूजा भी की जाती है। कुबेर की पूजा करने से घर में सालभर धनवर्षा होती है। दिवाली के दिन पूजा करने से पहले पूरे घर में गंगाजल छिड़का जाता है। उसके बाद रंगोली और घी के दीपक जलाए जाने चाहिए। पूजा स्थल की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाना चाहिए और उस पर भगवानों की मूर्ति रखी जानी चाहिए। इसके बाद मूर्ति पर तिलक लगाकर दीपक जलाया जाना चाहिएऔर फिर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि के साथ पूजा शुरू होनी चाहिए। पूजा के दौरान पूरे परिवार को एकत्रित होना चाहिए। पूजन के बाद श्रद्धा अनुसार ज़रुरतमंद लोगों को मिठाई और दक्षिणा दें।

दिवाली 2020: दिवाली पर क्या करें?

  • ​​दिवाली वाले दिन सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल की मालिश करने के बाद स्नान करने को बहुत शुभ माना जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से घर से पैसों की कमी दूर होती है।
  • इस दिन महालक्ष्मी की पूजा के बाद ही भोजन करना चाहिए।
  • दिवाली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें।
  • इस दिन भगवान की पूजा के बाद अपने पूर्वजों की पूजा करने को भी काफी शुभ माना जाता है।
  • विधिपूर्वक पूजा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता, अशांति और कलेश दूर होते हैं।

दिवाली 2020: दिवाली की पौराणिक कथा

दिवाली के त्यौहार को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं जिम्मेदार हैं। कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्री राम चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे, इस अवसर पर लोगों ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। इसके अलावा ऐसा माना जाता है कि नरकासुर नामक राक्षस ने अपनी असुर शक्तियों से देवताओं को काफी परेशान किया हुआ था, उसके बढ़ते अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्री कृष्ण से मदद ली और उन्होंने कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर दिया। तभी से कार्तिक मास की अमावस्या को लोग दीप जलाकर दिवाली मनाते हैं।

दिवाली 2020: दिवाली के ज्योतिषीय तथ्य

ज्योतिषियों की मान्यता है कि दिवाली के दिन सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित होते हैं। यह स्थिति सभी के लिए शुभ और सकारात्मक होती है। दिवाली का आध्यात्मिक और सामाजिक हर तरह से महत्व होता है। हिंदू धर्म में दिवाली को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप मनाया जाता है।

हम आशा करते हैं कि साल 2020 में दिवाली आप सबके लिए खुशियां लेकर आए। हमारी ओर से आपको दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें।