तीज 2019 दिनांक और महत्व

अगर हिंदू धर्म को पर्व त्योहारों का धर्म कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हिंदू धर्म में छोटे बड़े कई त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार का अपना अलग इतिहास और महत्व है। इन्हीं में एक त्योहार है तीज। तीज यानी तृतीया, सुहागिन महिलाएं इस त्योहार को बहुत ही प्रेम और श्रद्धा के साथ मनाती हैं। वैसे तो तीज पूरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है पर उत्तर भारत में तीज का विशेष महत्व है। सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली तीज पर्व को श्रावणी तीज कहा जाता है। उत्तर भारत में इसी तीज को हरियाली तीज के नाम से भी जाना जाता है। श्रावण और भाद्रपद के महीने में होने वाला यह त्योहार उत्तर भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेश, यूपी, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड में प्रमुखता से मनाया जाता है। इस व्रत की खासियत यह होती है कि इसे करने वाली विवाहित महिलाएं होती हैं। लोक मान्यता है कि तीज व्रत रखने से सुहागिनों के सौभाग्य में वृद्धि होती है। जहां उनके पतियों को दीर्घायु जीवन की प्राप्ति होती है तो वहीं घर परिवार में धन धान्य की बढ़ोतरी भी होती है। सुख समृद्धि एवं खुशहाली का परिवार में आगमन होता है। कहा जाता है कि जो भी महिला तीज का व्रत रखती है, उसका सुहाग हमेशा बना रहता है। भारत में तीन तरह के तीज मनाए जाते हैं। एक हरियाली तीज, दूसरा हरतालिका तीज और तीसरा कजरी तीज.

तीज व्रत का विशेष महत्व

लोक मान्यताओं के अनुसार तीज का पावन पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह जुलाई या अगस्त के महीने में आता है। कथाओं के अनुसार मां पार्वती ने अपने सौ वर्षों की साधना तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रुप में तीज के दिन ही पाया था। हिंदू धर्म में तीज व्रत का महत्व शिखर पर है। माना जाता है कि इसी दिन महादेव और पार्वती का मिलन हुआ था। इस व्रत के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वयं माता पार्वती नियमित रुप से यह व्रत रखती थीं ताकी उन्हें हमेशा महादेव का साथ मिलता रहे। यही कारण है कि जो महिलाएं तीज का व्रत रखती हैं उन्हें भगवान भोलेनाथ जैसा वर मिलता है। जो भी महिला इस व्रत को विधि विधान से करती हैं उनपर माता पार्वती और भोलेनाथ की कृपा बरसती है, जिससे की उनके पति को दीर्घायु जीवन की प्राप्ति होती है। वहीं आजकल कई कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की चाहत में इस व्रत को करती हैं, हालांकि ऐसा व्रत करने वाली कुंवारी कन्याओं की संख्या कम है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से जो सौभाग्य और सुख विवाहित महिलाओं को प्राप्त नहीं होता, वह माता पार्वती और भोलेनाथ की कृपा से प्राप्त हो जाता है। कुल मिलाकर देखें तो यह पारिवारिक सुख समृद्धि लाने वाला पर्व है क्योंकि बिना स्त्री के कोई भी परिवार पूर्ण नहीं कहलाता है।

तीन प्रकार की होती है तीज

  1. हरियाली तीज
  2. हरतालिका तीज
  3. कजरी तीज

जैसा की हम पहले ही आपको बता चुके हैं कि तीज तीन तरह की होती है। हरियाली, हरतालिका और कजरी। इन तीनों तीजों का अपना अलग महत्व होता है। आज हम आपको इन तीनों तीज के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। इन तीनों तीजों में व्रत रखने की और पूजा की विधि एक दूसरे से काफी भिन्न है। ऐसी मान्यता है कि इन तीनों तीजों में व्रत रखने से विशेष रूप से सुहागिन स्त्रियों को परम सौभाग्य की प्राप्ति होती है एवं परिवार में सुख, समृद्धि बनी रहती है।

1. हरियाली तीज

वर्ष 2019 में हरियाली तीज 03 अगस्त को मनाई जाएगी। ये तीज यूपी, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में ज्यादा प्रचलित है। इन इलाकों में तकरीबन हर हिंदू महिला यह व्रत रखती है। जिस समय यह तीज होता है उस वक्त इन इलाकों में प्रकृति की हरियाली देखते ही बनती है, इसलिए इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस व्रत में शिव पार्वती की पूजा होती है। जगह-जगह मेले लगते हैं और बच्चे झूले और पकवान का आनंद लेते हैं।

हरियाली तीज मुहूर्त

तीज प्रारंभ 3 अगस्त, 2019 01:37:23 बजे से
तीज समापन 3 अगस्त, 2019 22:06:45 बजे तक

क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज ?

हरियाली तीज व्रत को मनाने के पीछे यूँ तो बहुत सी पौरणिक कथाएं जुड़ी है लेकिन इनमें से जो सबसे प्रमुख है, वह यह है कि इसी दिन देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिया था और उन्हें अपनी अर्धांगनी के रुप में स्वीकारने का वचन दिया था। भगवान शिव द्वारा पत्नी के रुप में सहमति मिलने पर माता पार्वती के मन में प्रसन्नता छा गई थी जिसकी वजह से इसे हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है। मन में भगवान भोलेनाथ जैसा पति पाने की इच्छा लिए विशेष रूप से स्त्रियां इस व्रत का पालन करती हैं।

हरियाली तीज के दिन क्या करती हैं महिलाएं

ऐसी मान्यता है कि हरियाली तीज व्रत रखने वाली सभी सुहागिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार जरूर करना चाहिए। लिहाजा इस व्रत को रखने वाली महिलाओं को इस दिन सजने सँवरने का ख़ास अवसर मिलता है। इस दिन सुहागिन महिलाओं को उनके ससुराल पक्ष से नए वस्त्र और गहने मिलते हैं जिसे सिंधारा कहते हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर शंकर पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं। स्त्रियां इस दिन गीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और माता पार्वती की झांकी निकालती हैं।

हरियाली तीज की पूजा विधि

शिव पुराण के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शंकर का पुनर्मिलन हुआ था। हरियाली तीज की पूजा विधि इस प्रकार है।

  • स्नानादि के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर की साफ सफाई कर तोरण मंडप से सजावट करें।
  • एक चौकी पर गंगाजल से गूंथे गए मिट्टी पर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता पार्वती और सखियों की मूर्ति बनाएं।
  • देवताओं का आह्वान करते हुए षोडशोपचार पूजन करें।
  • रात्रि जागरण करें एवं आसपास की महिलाओं के साथ मिलकर मंगल गीत गाएं।

2. हरतालिका तीज

वर्ष 2019 में हरतालिका तीज 01 सितंबर 2019 को मनायी जाएगी। यह तीज भगवान शंकर जैसा वर पाने की चाह में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान् शिव और माता पार्वती की पहली बार भेंट हुई थी। चूँकि हरतालिका तीज विशेष रूप से श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है इसलिए इसे श्रावणी तीज भी कहते हैं।

हरतालिका तीज मुहूर्त

प्रातः काल मुहूर्त 5:58:51 से 18:31:45 बजे तक
अवधि 2 घंटे 32 मिनट
प्रदोष काल मुहूर्त 18:43:16 से 20:58:30 बजे तक

क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज ?

ऐसी कथा प्रचलित है कि जब माता पार्वती की सहेलियों ने उन्हें एक कंदरा में छिपा दिया था तब उनकी मुलाकात सहसा भोलेनाथ से हो गई थी। हरतालिका शब्द का संधि विच्छेद करें तो हरत अर्थात अगवा और तालिका मतलब सहेली। इससे अभिप्राय है कि सहेलियों द्वारा हरण करना। इस दिन सुहागिन महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर झूला आदि झूलती हैं। हरतालिका तीज मुख्य रूप से सम्पूर्ण उत्तर भारत में मनाई जाती है।

इस दिन क्या करती हैं महिलाएं

इस पर्व पर व्रत रखने वाली महिलाएं विशेष रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस दिन घर में कन्या पूजन भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन कन्या पूजन करने से सौभाग्य की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही साथ परिवार में भी खुशहाली आती है। इसके अलावा इस दिन सुहागिन स्त्रियां मुख्य रूप से अपने हाथों में महंदी लगवाती हैं और पति के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जाने का भी इस दिन रिवाज है।

हरतालिका तीज की पूजन विधि

हरतालिका पूजा प्रदोष काल में होता है। यह वह समय होता है जब दिन और रात का मिलन होता है। इसके लिए शिव परिवार के सभी सदस्यों की प्रतिमा बालू अथवा काली मिट्टी से बनाई जाती है, यानि की भोलेनाथ, माता पार्वती और गणेश जी। तीनों प्रतिमाओं को केले के पत्ते पर रखा जाता है। इस पूजा में एक खास तरह का कलश भी बनाया जाता है और इसके चारों ओर आम का पत्ता लगाया जाता है। सबसे पहले पूजा इस कलश की ही होती है, उसके बाद भगवान गणेश की पूजा होती है। तत्पश्चात भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा कर इस व्रत को संपन्न किया जाता है।

3. कजरी तीज

कजरी तीज को कजली तीज भी कहते हैं। इसे भाद्रपद के कृष्ण पक्ष को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार यह तिथि जुलाई या अगस्त महीने में आती है। यह व्रत शादीशुदा महिलाएं ही रखती है। कजरी तीज यूपी, एमपी, बिहार, झारखंड और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में व्यापक पैमाने पर मनाई जाती है। अन्य दोनों तीजों की तरह यह तीज भी सुहागिनों के लिए ही होता है। पंजाब और हरियाणा में इसे बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज कहते हैं। ऐसी मान्यता है की कजरी तीज को रखने से वैवाहिक जीवन मंगलमय होता है और पारिवारिक जीवन भी खुशहाल रहता है ।

कजरी तीज मुहूर्त

तीज प्रारंभ 17 अगस्त, 2019 22:50:07 बजे से
तीज समापन 17 अगस्त, 2019 01:15:15 बजे तक

क्यों मनाई जाती है कजरी तीज ?

कजरी तीज को मनाने के पीछे कई तरह की पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई है। इनमें जो सबसे महत्वपूर्ण है, उसके मुताबिक मध्य भारत में कजली नामक एक घना जंगल हुआ करता था। इस जंगल के आसपास दादूरई नामक राजा का शासन था। यहां के लोग खूब गाना बजाना किया करते थें अर्थात संगीत प्रेमी थें। एक दिन राजा का अचानक निधन हो गया। उनकी रानी ने सती प्रथा का पालन करते हुए खुद भी मौत को गले लगा लिया था। पति के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए लोग उन्हें कजरी के रुप में सम्मानित करने लगें। संयोगवश वह दिन तीज का था, इसलिए उस दिन से कजरी तीज की शुरुआत हो गई।

इस दिन क्या करती हैं महिलाएं

इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पति समेत बाल बच्चे और पूरे परिवार के लिए लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं सबसे पहले सुबह उठ कर स्नान करती हैं और सोलह श्रृंगार कर मंदिर जाती है। स्त्रियां वहां दीपक जलाकर भगवान से मन्नत मांगती है। वैसे तो इस दिन व्रत का कोई खास नियम नहीं है लेकिन फिर भी अधिकांश महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं। रात्रि में महिलाएं शिव पार्वती का श्रृंगार करती हैं और अपने सास ससुर और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों को उपहार देती हैं। इन उपहारों को सिंधारा या श्रिजनहारा कहा जाता है।

कजरी तीज की पूजा विधि

कजरी तीज की पूजा विधि अन्य दोनों तीजों से अलग होती है। इस पर्व में नीमड़ी माता का पूजन किया जाता है। पूजा से पहले एक दीवार पर मिट्टी और गोबर से तालाब जैसी आकृति बना कर चारों ओर नीम की टहनियों को रोप दिया जाता है, फिर इस तालाब में कच्चा दूध और जल डालकर किनारे घी का दीपक जलाया जाता है। एक ओर थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रौली, मौली, अक्षत, आदि रखा जाता है। एक लोटे में कच्चा दूध रख कर नीमड़ी माता की पूजा की जाती है।

कजरी तीज पूजा नियम

  • सर्वप्रथम माता नीमड़ी को जल अपर्ण किया जाता है और रोली के छींटे देकर चावल चढ़ाया जाता है।

  • इसके बाद नीमड़ी माता के पीछे एक दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल की 13-13 बिंदू बनाते हैं और उन्हें अंगुली से सजाते हैं।

  • यह बिंदू अनामिका उंगली से लगाते हैं जबकि काजल की बिंदी तर्जनी उंगली से लगाते हैं।

  • इसके बाद नीमड़ी माता को मेहंदी और काजल लगाकर उन्हें वस्त्र अपर्ण किया जाता है।

  • इसके साथ ही माता को फल और दक्षिणा भेंट में चढ़ाते हैं और अगले दिन इस फल और दक्षिणा को कन्याओं के बीच वितरित कर दिया जाता है।

हम आशा करते हैं की तीज व्रत से जुड़ी सभी जानकारी आपको हमारे इस लेख के जरिये प्राप्त हो गयी होगी। आप सभी को तीज पर्व की ढेरों शुभकामनाएं !